अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर छात्रों ने लिया संकल्प, “भारत को और अधिक समर्थ बनाने के लिए हम तैयार हैं”

तकनीकी दक्षता, रोजगार सृजन और राष्ट्रसेवा के माध्यम से नई पीढ़ी को सशक्त बना रहा है समर्थ भारत

दैनिक इंडिया न्यूज़, लखनऊ।
राष्ट्र निर्माण केवल नारों से नहीं, बल्कि समर्पित कर्म और दूरदर्शी प्रयासों से होता है। कुछ ऐसे ही राष्ट्रभक्त स्वयंसेवकों का समूह आज देशभर में युवाओं के भविष्य को नई दिशा देने में जुटा है। राष्ट्रप्रेम, आत्मनिर्भरता और कौशल विकास के संकल्प के साथ कार्यरत समर्थ भारत संगठन उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ सहित विभिन्न क्षेत्रों में युवाओं को रोजगारपरक तकनीकी प्रशिक्षण देकर भारत को एक सशक्त राष्ट्र बनाने के अभियान में निरंतर अग्रसर है।

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर समर्थ भारत द्वारा आयोजित विशेष कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं ने योगाभ्यास कर न केवल स्वस्थ जीवन का संदेश दिया, बल्कि राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों को निभाने का भी संकल्प लिया। कार्यक्रम में उपस्थित युवाओं ने कहा कि स्वस्थ शरीर, कुशल हाथ और राष्ट्रभक्ति से परिपूर्ण मन ही भारत को विश्वगुरु बनाने का आधार बन सकता है।
समर्थ भारत का मानना है कि देश की सबसे बड़ी शक्ति उसका युवा वर्ग है। यदि युवाओं को सही दिशा, तकनीकी दक्षता और रोजगारपरक प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाए तो भारत विश्व की सबसे बड़ी आर्थिक और सामाजिक शक्ति के रूप में उभर सकता है। इसी उद्देश्य से संगठन द्वारा ब्यूटीशियन प्रशिक्षण, कॉस्मेटिक एवं सौंदर्य उद्योग से जुड़े विविध पाठ्यक्रम, एसी एवं रेफ्रिजरेशन रिपेयरिंग, ड्राइवर प्रशिक्षण तथा अन्य रोजगारपरक तकनीकी क्षेत्रों में युवाओं को प्रशिक्षित किया जा रहा है। संगठन के स्वयंसेवक पूर्ण निष्ठा और समर्पण के साथ इन योजनाओं को धरातल पर उतारने में जुटे हुए हैं।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि जीवन को जोड़ने और संतुलित करने की भारतीय जीवन पद्धति है। हजारों वर्ष पूर्व भारत के ऋषि-मुनियों द्वारा विकसित योग आज संपूर्ण विश्व को स्वास्थ्य, मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का मार्ग दिखा रहा है। कभी कुपोषण, कभी अनियमित जीवनशैली और कभी तनावजनित समस्याओं से जूझ रही आधुनिक दुनिया के लिए योग एक संपूर्ण समाधान बनकर उभरा है।
उन्होंने कहा कि यह भारत की सांस्कृतिक शक्ति का ही परिणाम है कि आज संयुक्त राष्ट्र से लेकर विश्व के अधिकांश देशों तक 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह केवल योग की विजय नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा की वैश्विक स्वीकृति का भी प्रतीक है।
योग सत्र के उपरांत छात्र-छात्राओं ने एक स्वर में राष्ट्र के युवाओं का आह्वान करते हुए कहा, “हम भारत को अधिक समर्थ, आत्मनिर्भर और विकसित बनाने की यात्रा पर निकल चुके हैं। हम अपने कौशल, परिश्रम और राष्ट्रभक्ति के बल पर नए भारत का निर्माण करेंगे। क्या आप भी इस अभियान में हमारे साथ जुड़ेंगे?”
समर्थ भारत के इस प्रयास ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यदि योग के माध्यम से स्वस्थ शरीर, तकनीकी प्रशिक्षण के माध्यम से कुशल हाथ और राष्ट्रभक्ति के माध्यम से जागृत चेतना का निर्माण किया जाए तो भारत को विकसित राष्ट्र बनने से कोई नहीं रोक सकता। आज आवश्यकता केवल इतनी है कि प्रत्येक युवा अपने भीतर छिपी शक्ति को पहचाने और राष्ट्र निर्माण की इस ऐतिहासिक यात्रा का सहभागी बने।
“समर्थ युवा, समर्थ समाज और समर्थ भारत” का यह अभियान आने वाले वर्षों में न केवल लाखों युवाओं के जीवन को नई दिशा देगा, बल्कि आत्मनिर्भर एवं विकसित भारत के स्वप्न को भी साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।