ब्रेकिंग न्यूज़
भोजशाला विवाद निर्णायक मोड़ पर, सुप्रीम कोर्ट से तत्काल राहत न मिलने पर हिंदू पक्ष उत्साहित | भोजशाला में बड़ी विजय की ओर हिंदू पक्ष, सुप्रीम कोर्ट के रुख से मुस्लिम पक्ष में बढ़ी बेचैनी | मुख्यमंत्री डैशबोर्ड समीक्षा बैठक में सीडीओ सख्त, योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और जनपद की रैंकिंग सुधारने के दिए निर्देश | होमगार्ड भर्ती प्रक्रिया का जिलाधिकारी आनंद वर्द्धन ने किया औचक निरीक्षण, निष्पक्षता और पारदर्शिता पर दिया विशेष जोर | महाशिवरात्रि : अद्वैत-तत्त्व की परम महानिशा — अभयानंद सरस्वती | भारतीय संस्कृति के पुनर्जागरण का सूत्रपात, बाल संस्कारशाला अभियान को जन-जन तक पहुँचाने का आह्वान | गुरुसत्ता के प्रति अहर्निश निष्ठा : ब्रह्मविद्या, ऋतंभरा प्रज्ञा और विवेक का सनातन रहस्य - अभयानंद सरस्वती | 'केवल वृक्ष मत लगाइए, वृक्षपालक बनिए' : जितेंद्र प्रताप सिंह | भोजशाला विवाद निर्णायक मोड़ पर, सुप्रीम कोर्ट से तत्काल राहत न मिलने पर हिंदू पक्ष उत्साहित | भोजशाला में बड़ी विजय की ओर हिंदू पक्ष, सुप्रीम कोर्ट के रुख से मुस्लिम पक्ष में बढ़ी बेचैनी | मुख्यमंत्री डैशबोर्ड समीक्षा बैठक में सीडीओ सख्त, योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और जनपद की रैंकिंग सुधारने के दिए निर्देश | होमगार्ड भर्ती प्रक्रिया का जिलाधिकारी आनंद वर्द्धन ने किया औचक निरीक्षण, निष्पक्षता और पारदर्शिता पर दिया विशेष जोर | महाशिवरात्रि : अद्वैत-तत्त्व की परम महानिशा — अभयानंद सरस्वती | भारतीय संस्कृति के पुनर्जागरण का सूत्रपात, बाल संस्कारशाला अभियान को जन-जन तक पहुँचाने का आह्वान | गुरुसत्ता के प्रति अहर्निश निष्ठा : ब्रह्मविद्या, ऋतंभरा प्रज्ञा और विवेक का सनातन रहस्य - अभयानंद सरस्वती | 'केवल वृक्ष मत लगाइए, वृक्षपालक बनिए' : जितेंद्र प्रताप सिंह |
हाइलाइट न्यूज़
<em>सहारा हॉस्पिटल में "विश्व रक्तदाता दिवस" पर रक्तदान जागरूकता अभियान शुरू</em> अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर 51 महिलाओं का सम्मान, उत्साह और उल्लास के साथ मनाया गया कार्यक्रम तकनीकी का प्रयोग व प्राकृतिक खेती आज की आवश्यकता : सीएम योगी “विश्वास की पुनर्स्थापना और अन्याय के प्रतिकार का संकल्प: बंगाल की जनभावना का निर्णायक क्षण” पूर्वोत्तर रेलवे का वाराणसी मंडल बना यात्री सुविधाओं के विकास का मॉडल यूपी को 3 नई वंदे भारत की सौगात, एक को विस्तार, सीएम योगी ने जताया आभार  सीतापुर पत्रकार हत्याकांड: सगे भाई शूटर एनकाउंटर में ढेर, मां मुस्लिम, पिता हिंदू — दोनों के नामों में 'तिवारी' भी, 'खान' भी! बेमौसम बारिश से किसानों की फसलें बर्बाद, खेतों में तैरता दिखा धान — किसानों की मेहनत पर फिरा पानी <em>सहारा हॉस्पिटल में "विश्व रक्तदाता दिवस" पर रक्तदान जागरूकता अभियान शुरू</em> अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर 51 महिलाओं का सम्मान, उत्साह और उल्लास के साथ मनाया गया कार्यक्रम तकनीकी का प्रयोग व प्राकृतिक खेती आज की आवश्यकता : सीएम योगी “विश्वास की पुनर्स्थापना और अन्याय के प्रतिकार का संकल्प: बंगाल की जनभावना का निर्णायक क्षण” पूर्वोत्तर रेलवे का वाराणसी मंडल बना यात्री सुविधाओं के विकास का मॉडल यूपी को 3 नई वंदे भारत की सौगात, एक को विस्तार, सीएम योगी ने जताया आभार  सीतापुर पत्रकार हत्याकांड: सगे भाई शूटर एनकाउंटर में ढेर, मां मुस्लिम, पिता हिंदू — दोनों के नामों में 'तिवारी' भी, 'खान' भी! बेमौसम बारिश से किसानों की फसलें बर्बाद, खेतों में तैरता दिखा धान — किसानों की मेहनत पर फिरा पानी
अपराध ब्रेकिंग English

“विनाश की विभीषिका में करुणा का उदय, और राजनीति के प्रहारों के बीच सुलगता सच”

विकास नगर रिंग रोड किनारे झुग्गी बस्ती में भीषण आग से 300 से अधिक आशियाने जलकर राख हो गए, हालांकि प्रशासन की तत्परता से बड़ा क्षेत्र विनाश से बच गया। आपदा के बाद लखनऊ की जनता, समाजसेवी संस्थाएं और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने एकजुट होकर भोजन, पानी व राहत की व्यापक व्यवस्था की। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार पीड़ितों को किसी प्रकार की मूलभूत कमी नहीं है और राहत कार्य लगातार जारी है। लोहिया नगर के पार्षद राकेश मिश्रा भी मौके पर सक्रिय रहकर व्यवस्थाओं की निगरानी कर रहे हैं। इसी बीच, घटना को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए, जिस पर सत्ता पक्ष ने विपक्ष पर संवेदनहीनता का आरोप लगाते हुए कड़ी आपत्ति जताई है।

D

Dainik India News

93 views
“विनाश की विभीषिका में करुणा का उदय, और राजनीति के प्रहारों के बीच सुलगता सच”


दैनिक इंडिया न्यूज़, लखनऊ।

विगत दिनों विकास नगर क्षेत्र के रिंग रोड किनारे बसी झुग्गी-झोपड़ियों में भड़की भीषण अग्नि ने देखते ही देखते जीवन की समस्त संचित पूंजी को भस्म कर दिया। दहकती लपटें, तपती हवाएं, प्लास्टिक से निर्मित आवास, गैस सिलेंडरों का विस्फोटक खतरा, पेट्रोल-डीजल की उपस्थिति और चारों ओर फैले विद्युत तार—इन सभी ने मिलकर उस अग्निकांड को ऐसी भयावहता प्रदान की, जिसने मानो पूरे क्षेत्र को विनाश के मुहाने पर खड़ा कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि यदि प्रशासन ने त्वरित निर्णय लेते हुए विद्युत आपूर्ति बाधित न की होती और संपूर्ण शक्ति के साथ राहत कार्य न किया होता, तो यह आग विकास नगर से निकलकर कल्याणपुर और जानकीपुरम तक अपने विकराल विस्तार में किसी महाविनाश का कारण बन सकती थी।


इस अग्निकांड ने 300 से अधिक झुग्गियों को राख में तब्दील कर दिया, असंख्य परिवारों को बेघर कर दिया, और जीवन की वर्षों की मेहनत को एक क्षण में निगल लिया। किंतु इस त्रासदी के बीच जो दृश्य उभरा, वह मानवता की सर्वोच्च अभिव्यक्ति बनकर सामने आया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पीड़ितों के लिए भोजन, पानी, वस्त्र या आश्रय की कोई कमी नहीं है—आम जनमानस से लेकर प्रशासन तक, और आसपास के समाजसेवी संगठनों से लेकर स्वयंसेवी समूहों तक, सभी ने एकजुट होकर सेवा का ऐसा अप्रतिम उदाहरण प्रस्तुत किया है, जिसने आपदा को मानवीय संवेदना के उत्सव में परिवर्तित कर दिया। विशेष रूप से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एवं अन्य सामाजिक संस्थाएं तन-मन-धन से राहत कार्यों में संलग्न दिखाई दीं, मानो हर पीड़ित उनके अपने परिवार का सदस्य हो।


इसी क्रम में लोहिया नगर के पार्षद राकेश मिश्रा भी निरंतर अपने सहयोगियों के साथ घटनास्थल पर सक्रिय रहकर हर छोटी-बड़ी समस्या पर नजर बनाए हुए हैं। उनकी सतत उपस्थिति और सजगता यह संकेत देती है कि आपदा के इस दौर में जनप्रतिनिधियों की भूमिका केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं, बल्कि वास्तविक सेवा और समर्पण में भी परिलक्षित हो सकती है।

जहां एक ओर यह त्रासदी मानवता के उत्कर्ष का प्रमाण बनी, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक परिदृश्य में आरोप-प्रत्यारोप की चिंगारियां भी भड़कती नजर आईं। सत्ता पक्ष के कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों द्वारा यह स्पष्ट रूप से कहा गया कि इस प्रकार की संवेदनशील घटना को “कूट-रचित साजिश” करार देना न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि यह उन हजारों लोगों की पीड़ा का भी उपहास है, जो वास्तव में इस अग्निकांड से प्रभावित हुए हैं। उनका तंज साफ है—क्या आपदा भी अब राजनीतिक अवसरवाद का माध्यम बन चुकी है? क्या राख में तब्दील हुए घरों की आंच पर भी सियासी रोटियां सेंकी जाएंगी?


ज्ञापन सौंपकर प्रशासन से निष्पक्ष जांच और कठोर कार्रवाई की मांग करते हुए कार्यकर्ताओं ने यह भी कहा कि निराधार आरोप समाज में वैमनस्य और अविश्वास की खाई को और गहरा करते हैं। ऐसे समय में जब आवश्यकता संवेदनशीलता और सहयोग की है, तब विभाजनकारी बयान न केवल अनुचित हैं, बल्कि सामाजिक ताने-बाने के लिए घातक भी सिद्ध हो सकते हैं।

यह घटना केवल एक अग्निकांड नहीं, बल्कि एक ऐसा दर्पण है जिसमें समाज का दोहरा स्वरूप स्पष्ट झलकता है—एक ओर करुणा, सहयोग और मानवीय एकता का उज्ज्वल पक्ष, तो दूसरी ओर राजनीति की तीखी बयानबाजी और अवसरवाद का धुंधलका। अब यह समय की कसौटी है कि हम इस राख से केवल पुनर्निर्माण की नींव रखें, या फिर इसी धुएं में सच्चाई और संवेदनशीलता को भी खो दें।

टिप्पणियाँ

अभी कोई टिप्पणी नहीं। पहले टिप्पणी करें!