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गोरखपुर में “25 लीटर दूध से 40 क्विंटल पनीर” का खेल उजागर

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Dainik India News

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गोरखपुर में “25 लीटर दूध से 40 क्विंटल पनीर” का खेल उजागर
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डिटर्जेंट, पेंट और केमिकल से तैयार हो रहा था मौत का सफेद जहर

खाद्य विभाग की छापेमारी में नकली पनीर फैक्ट्री का सनसनीखेज खुलासा

दैनिक इंडिया न्यूज़, गोरखपुर।25 मई 2026

पूर्वांचल की धरती गोरखपुर से सामने आई एक भयावह सच्चाई ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। जिस पनीर को लोग अपने बच्चों की सेहत, परिवार के पोषण और स्वादिष्ट भोजन का हिस्सा समझकर खरीद रहे थे, वही पनीर अब “सफेद जहर” बनकर लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ करता मिला। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि विभाग की छापेमारी में एक ऐसी अवैध फैक्ट्री का भंडाफोड़ हुआ है, जहां महज 25 लीटर दूध के सहारे प्रतिदिन लगभग 40 क्विंटल नकली पनीर तैयार किया जा रहा था। यह खुलासा सिर्फ मिलावट का मामला नहीं, बल्कि मानव जीवन के साथ किया जा रहा एक सुनियोजित अपराध माना जा रहा है।

जांच के दौरान अधिकारियों की आंखें उस समय फटी रह गईं जब फैक्ट्री के भीतर दूध से ज्यादा मात्रा में डिटर्जेंट पाउडर, फैब्रिक व्हाइटनर, पोस्टर कलर, पेंट, पाम ऑयल, सिंथेटिक केमिकल और सैकरीन जैसे खतरनाक पदार्थ बरामद हुए। इन्हीं जहरीले रसायनों को मशीनों के जरिए मिलाकर ऐसा चमकदार नकली पनीर तैयार किया जा रहा था, जिसे देखकर आम आदमी असली और नकली में फर्क ही न कर सके। बताया जा रहा है कि यह जहरीला पनीर गोरखपुर सहित आसपास के कई जिलों में धड़ल्ले से सप्लाई किया जा रहा था और होटल, ढाबों से लेकर बाजारों तक पहुंच रहा था।

छापेमारी के दौरान फैक्ट्री से भारी मात्रा में नकली पनीर बरामद किया गया, जिसे मौके पर ही नष्ट कराया गया। खाद्य विभाग ने नमूनों को जांच के लिए प्रयोगशाला भेज दिया है तथा फैक्ट्री संचालकों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि यह कारोबार लंबे समय से चल रहा था और प्रतिदिन लाखों रुपये की अवैध कमाई की जा रही थी। स्थानीय ग्रामीणों ने भी स्वीकार किया कि फैक्ट्री से लंबे समय से तेज दुर्गंध और केमिकलयुक्त गंदा पानी निकलता था, जिससे आसपास का वातावरण दूषित हो रहा था।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे नकली पनीर का लगातार सेवन पेट, लीवर, किडनी और हार्मोन से जुड़ी गंभीर बीमारियों को जन्म दे सकता है। यहां तक कि कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी का खतरा भी बढ़ सकता है। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर लोगों की थाली तक पहुंचने वाले खाद्य पदार्थ कितने सुरक्षित हैं और खाद्य माफियाओं के हौसले इतने बुलंद क्यों हैं।

गोरखपुर का यह खुलासा केवल एक जिले की घटना नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए चेतावनी है। अब समय आ गया है कि खाद्य माफियाओं के खिलाफ केवल कार्रवाई नहीं, बल्कि कठोरतम दंड सुनिश्चित किया जाए ताकि लोगों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ करने वालों को कानून का असली भय महसूस हो सके।

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