ब्रेकिंग न्यूज़
पंकज सिंह से मिले जितेन्द्र प्रताप सिंह, नोएडा कार्यक्रम में सपरिवार सहभागिता का आमंत्रण | गौ सेवा आयोग में नई जिम्मेदारी, भानु प्रकाश पांडेय का मधुबन में जोरदार स्वागत | मोदी के जन्मदिन पर गोमती तट पर उतरेगा भोजपुरी समाज | सड़क किनारे कचरे का पहाड़ देख हाईकोर्ट सख्त, नगर निगम को स्थायी समाधान का आदेश | ₹5 लाख का इलाज, ₹5 लाख की कल्याण निधि, 900 नई अदालतें—योगी ने खोला न्याय का नया अध्याय | पद्मश्री डॉ. एस. सी. राय की धर्मपत्नी श्रीमती मधु राय का निधन, शोक की लहर | हिंदी केवल भाषा नहीं, भारत की आत्मा का स्वर है—अब इसे जीवन और व्यवस्था की भाषा बनाने का समय | जिस दिन भारत अपनी हिंदी को भूल जाएगा, उसी दिन अपनी आत्माभिव्यक्ति का एक अध्याय खो देगा—अजय दीप सिंह IAS | पंकज सिंह से मिले जितेन्द्र प्रताप सिंह, नोएडा कार्यक्रम में सपरिवार सहभागिता का आमंत्रण | गौ सेवा आयोग में नई जिम्मेदारी, भानु प्रकाश पांडेय का मधुबन में जोरदार स्वागत | मोदी के जन्मदिन पर गोमती तट पर उतरेगा भोजपुरी समाज | सड़क किनारे कचरे का पहाड़ देख हाईकोर्ट सख्त, नगर निगम को स्थायी समाधान का आदेश | ₹5 लाख का इलाज, ₹5 लाख की कल्याण निधि, 900 नई अदालतें—योगी ने खोला न्याय का नया अध्याय | पद्मश्री डॉ. एस. सी. राय की धर्मपत्नी श्रीमती मधु राय का निधन, शोक की लहर | हिंदी केवल भाषा नहीं, भारत की आत्मा का स्वर है—अब इसे जीवन और व्यवस्था की भाषा बनाने का समय | जिस दिन भारत अपनी हिंदी को भूल जाएगा, उसी दिन अपनी आत्माभिव्यक्ति का एक अध्याय खो देगा—अजय दीप सिंह IAS |
हाइलाइट न्यूज़
यूपी विधानसभा के पूर्व स्पीकर पंडित केशरी नाथ त्रिपाठी का निधन, लंबे समय से चल रहे थे बीमार मान्यता प्राप्त पत्रकारों हेतु आयुष्मान कार्ड शिविर का आयोजन 21 व 22 अगस्त को होली के पावन पर्व पर प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं- राजेश खेत में मिले युवक व किशोरी के शव उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक के आवास पहुंचे रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, परिवारजनों से की भेंट नारायण सेवा संस्थान का लखनऊ में विशाल निशुल्क नारायण लिम्ब शिविर 28 को नवरात्र-दशहरा पर्व पर मधुबन पुलिस का फ्लैग मार्च, अमन बिगाड़ने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई सहा परियोजना निदेशक डूडा द्वारा अपनी व्यक्तिगत पत्रावली उपलब्ध न कराने की दशा में दर्ज कराया जाएगा मुकदमा : अपर जिलाधिकारी यूपी विधानसभा के पूर्व स्पीकर पंडित केशरी नाथ त्रिपाठी का निधन, लंबे समय से चल रहे थे बीमार मान्यता प्राप्त पत्रकारों हेतु आयुष्मान कार्ड शिविर का आयोजन 21 व 22 अगस्त को होली के पावन पर्व पर प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं- राजेश खेत में मिले युवक व किशोरी के शव उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक के आवास पहुंचे रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, परिवारजनों से की भेंट नारायण सेवा संस्थान का लखनऊ में विशाल निशुल्क नारायण लिम्ब शिविर 28 को नवरात्र-दशहरा पर्व पर मधुबन पुलिस का फ्लैग मार्च, अमन बिगाड़ने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई सहा परियोजना निदेशक डूडा द्वारा अपनी व्यक्तिगत पत्रावली उपलब्ध न कराने की दशा में दर्ज कराया जाएगा मुकदमा : अपर जिलाधिकारी
लेख / शोध English

दवाइयों से नहीं बचेगी ज़िंदगी

D

Dainik India News

4916 views
दवाइयों से नहीं बचेगी ज़िंदगी


एंटीबायोटिक युग के अंत और न्यूट्रीशनल संकट की दस्तक


हरेंद्र सिंह दैनिक इंडिया न्यूज़,नई दिल्ली।भारत आज एक ऐसे मौन किंतु घातक स्वास्थ्य आपातकाल की ओर बढ़ रहा है, जिसकी आहट तो हर गली, हर परिवार और हर अस्पताल में सुनाई दे रही है, लेकिन जिसकी जड़ तक पहुँचने में आधुनिक चिकित्सा विज्ञान भी असहज दिखाई दे रहा है। साइलेंट हार्ट अटैक, अचानक हाइपोग्लाइसीमिया, कार्डियक अरेस्ट, ब्रेन स्ट्रोक और प्रतिरोधक क्षमता का एकाएक ध्वस्त हो जाना अब विरल घटनाएँ नहीं रहीं। ये घटनाएँ इस बात का संकेत हैं कि देश का स्वास्थ्य ढांचा भीतर से दरक रहा है और आम नागरिक को यह तक भरोसा नहीं रह गया है कि अगली सुबह वह सुरक्षित देख पाएगा या नहीं।


आज की सबसे भयावह तस्वीर वह है, जहाँ पिता जीवित हैं और युवा पुत्र का असमय निधन हो रहा है। यह केवल किसी एक परिवार का शोक नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए चेतावनी है। यदि यही प्रवृत्ति बनी रही, तो आने वाले वर्षों में भारत की युवा जनसंख्या में भारी गिरावट एक संभावित यथार्थ बन जाएगी। यह संकट केवल स्वास्थ्य तक सीमित नहीं, बल्कि राष्ट्र की सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संरचना को भी गहराई से प्रभावित करेगा।


वर्ष 2005 के बाद भारत की खान-पान संस्कृति में आए आमूलचूल परिवर्तन ने इस संकट की आधारशिला रखी। फास्ट फूड, चाइनीज़ फूड, प्रोसेस्ड और रिफाइंड खाद्य पदार्थों ने परंपरागत संतुलित आहार को लगभग विस्थापित कर दिया। मोनोसोडियम ग्लूटामेट (MSG), ट्रांस फैट, कृत्रिम रंग, रासायनिक फ्लेवर और प्रिज़र्वेटिव्स ने धीरे-धीरे शरीर की कोशिकाओं में अपनी पैठ बना ली। इन तत्वों ने माइटोकॉन्ड्रियल स्तर पर क्षति पहुँचाकर शरीर की ऊर्जा उत्पादन प्रणाली को कमजोर कर दिया, जिसका प्रतिफल आज गिरते स्वास्थ्य और अचानक मौतों के रूप में सामने आ रहा है।


2020 में आई कोविड-19 महामारी ने इस संकट को और गहरा कर दिया। पोस्ट-कोविड सिंड्रोम, क्रॉनिक थकान, हृदय गति संबंधी विकार, न्यूरोलॉजिकल समस्याएँ और इम्यून सिस्टम की अस्थिरता अब सामान्य होती जा रही हैं। भोजन तो पहले की तरह किया जा रहा है, लेकिन शरीर की कोशिकाएँ आवश्यक पोषण के लिए संघर्ष कर रही हैं। यह एक ऐसा छिपा हुआ कुपोषण है, जिसे न तो आम व्यक्ति समझ पा रहा है और न ही सामान्य चिकित्सकीय जांचों में यह स्पष्ट हो पा रहा है।


स्थिति तब और अधिक चिंताजनक हो जाती है जब यह सामने आता है कि आज फल और सब्जियाँ भी पहले जैसी पोषक नहीं रहीं। आधुनिक खेती में अत्यधिक रासायनिक उर्वरकों, पेस्टिसाइड और इंसेक्टिसाइड के प्रयोग ने फलों और सब्जियों की पोषण क्षमता को 50 से 70 प्रतिशत तक घटा दिया है। इन रसायनों के अवशेष शरीर में प्रवेश कर लिवर, किडनी और एंडोक्राइन सिस्टम को धीरे-धीरे विषाक्त बना रहे हैं, जिसका प्रभाव दीर्घकालिक और घातक है।


इसी के समानांतर एक और अदृश्य संकट तेजी से उभर रहा है—एंटीबायोटिक का अनियंत्रित उपयोग। आज एक औसत व्यक्ति वर्ष में 12 से 15 बार दवाइयों का सेवन कर रहा है। बार-बार दी जा रही शक्तिशाली एंटीबायोटिक दवाइयाँ शरीर की प्राकृतिक प्रतिरोधक क्षमता को नष्ट कर रही हैं। चिकित्सा विज्ञान इसे एंटीबायोटिक रेज़िस्टेंस या सुपरबग संकट कहता है, जहाँ भविष्य में सामान्य संक्रमणों पर भी दवाइयाँ बेअसर हो जाएँगी।


जब वह समय आएगा, तब डॉक्टरों के पास उपचार के विकल्प सीमित रह जाएंगे और चिकित्सा जगत को अनिवार्य रूप से न्यूट्रीशनल मेडिसिन की ओर लौटना पड़ेगा। किंतु विडंबना यह होगी कि तब तक यह चिकित्सा पद्धति इतनी महंगी हो चुकी होगी कि सामान्य व्यक्ति के लिए इसे अपनाना कठिन हो जाएगा।

आज जो लोग पोषण की उपेक्षा कर रहे हैं, वे कल इसके लिए भारी कीमत चुकाने को विवश होंगे।
सच्चाई यह है कि आज हम भोजन कर रहे हैं, लेकिन पूर्ण आहार नहीं ले रहे। हम स्वाद के लिए खा रहे हैं, स्वास्थ्य के लिए नहीं। हमारी कोशिकाएँ ऊर्जा और सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी से जूझ रही हैं। शरीर बाहर से भरा हुआ दिखता है, लेकिन भीतर से कमजोर और खोखला होता जा रहा है।


इस भयावह परिदृश्य में समाधान केवल दवाइयों में नहीं, बल्कि पोषण को प्राथमिकता देने, जीवनशैली में अनुशासन लाने और कोशिकीय स्तर पर शरीर को सशक्त करने में निहित है। आज आवश्यकता इस बात की है कि समाज, चिकित्सक और नीति-निर्धारक आने वाले इस संकट को गंभीरता से समझें और समय रहते ठोस कदम उठाएँ। क्योंकि आने वाला समय केवल इलाज का नहीं, बल्कि पोषण, सजगता और राष्ट्रीय जिम्मेदारी का समय है।

फोटो गैलरी

टिप्पणियाँ

अभी कोई टिप्पणी नहीं। पहले टिप्पणी करें!