ब्रेकिंग न्यूज़
दहेज़ ले लिए हत्या करने के आरोप मे माँ बेटे गिरफ्तार | संस्कृतभारती के बारह दिवसीय प्रशिक्षण वर्ग का भव्य दीक्षांत समारोह सम्पन्न, उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने संस्कृत को बताया भारतीय ज्ञान परंपरा की जीवनरेखा | संस्कृतभारती के प्रशिक्षण वर्ग का भव्य दीक्षांत समारोह सम्पन्न | महावीर शाखा में हनुमान भक्ति का अद्भुत संगम, विशाल भंडारे में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब | संस्कृत राष्ट्रचेतना की प्राणवाहिनी, इसके संवर्धन हेतु समर्पित है संस्कृतभारती : जितेन्द्र प्रताप सिंह | आपके बिजली बिल में नई साजिश! आशीष गोयल की नीति से जनता को जानबूझकर तंग किया जा रहा है – मंत्री भी साथ? | प्रधानमंत्री मोदी के 4400 दिवसीय ऐतिहासिक कार्यकाल पर सजी जन चौपाल, मेयर सुषमा खर्कवाल ने सुनीं जनता की समस्याएं | आपके बिजली बिल में नई साजिश! आशीष गोयल की नीति से जनता को जानबूझकर तंग किया जा रहा है – मंत्री भी साथ? | दहेज़ ले लिए हत्या करने के आरोप मे माँ बेटे गिरफ्तार | संस्कृतभारती के बारह दिवसीय प्रशिक्षण वर्ग का भव्य दीक्षांत समारोह सम्पन्न, उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने संस्कृत को बताया भारतीय ज्ञान परंपरा की जीवनरेखा | संस्कृतभारती के प्रशिक्षण वर्ग का भव्य दीक्षांत समारोह सम्पन्न | महावीर शाखा में हनुमान भक्ति का अद्भुत संगम, विशाल भंडारे में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब | संस्कृत राष्ट्रचेतना की प्राणवाहिनी, इसके संवर्धन हेतु समर्पित है संस्कृतभारती : जितेन्द्र प्रताप सिंह | आपके बिजली बिल में नई साजिश! आशीष गोयल की नीति से जनता को जानबूझकर तंग किया जा रहा है – मंत्री भी साथ? | प्रधानमंत्री मोदी के 4400 दिवसीय ऐतिहासिक कार्यकाल पर सजी जन चौपाल, मेयर सुषमा खर्कवाल ने सुनीं जनता की समस्याएं | आपके बिजली बिल में नई साजिश! आशीष गोयल की नीति से जनता को जानबूझकर तंग किया जा रहा है – मंत्री भी साथ? |
हाइलाइट न्यूज़
पीएम आवास ग्रामीण के तहत यूपी को मिला अतिरिक्त 1.44 लाख घरों का कोटा नो क्लेम बोनस’ बेकार क्यों जाता है? वाहन बेचते समय ध्यान रखें, क्या है आपका नो क्लेम बोनस? प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव का शुभारम्भ दीप प्रज्वलित कर हुआ राजधानी रही औवल पात्रता, चेतना और ईश्वरीय विधान का सनातन विवेचन- जितेंद्र प्रताप सिंह लखनऊ में बजट चौपाल : विकसित भारत के संकल्प का घोष 02 अभियुक्त गिरफ्तार, कब्जे से चोरी का जनरेटर बरामद मुख्यमंत्री ने भारतरत्न अटल बिहारी वाजपेयी इकाना स्टेडियम में टैबलेट्स/स्मार्ट फोन्स वितरण योजना का शुभारम्भ किया पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की प्रथम पुण्य तिथि, राजधानी लखनऊ में प्रतिमा का हुआ अनावरण पीएम आवास ग्रामीण के तहत यूपी को मिला अतिरिक्त 1.44 लाख घरों का कोटा नो क्लेम बोनस’ बेकार क्यों जाता है? वाहन बेचते समय ध्यान रखें, क्या है आपका नो क्लेम बोनस? प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव का शुभारम्भ दीप प्रज्वलित कर हुआ राजधानी रही औवल पात्रता, चेतना और ईश्वरीय विधान का सनातन विवेचन- जितेंद्र प्रताप सिंह लखनऊ में बजट चौपाल : विकसित भारत के संकल्प का घोष 02 अभियुक्त गिरफ्तार, कब्जे से चोरी का जनरेटर बरामद मुख्यमंत्री ने भारतरत्न अटल बिहारी वाजपेयी इकाना स्टेडियम में टैबलेट्स/स्मार्ट फोन्स वितरण योजना का शुभारम्भ किया पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की प्रथम पुण्य तिथि, राजधानी लखनऊ में प्रतिमा का हुआ अनावरण
अंतरराष्ट्रीय English

अरशद मदनी का बयान- हम नहीं मानते तालिबान दहशतगर्द, आजादी के लिए लड़ना अगर दहशतगर्दी है तो फिर नेहरू-गांधी भी दहशतगर्द थे

ब्यूरो डीडी इंडिया

54 views

तालिबान और दारुल उलूम दोनों देवबंद विचारधारा को मानते हैं. इसी वजह से अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद दारुल उलूम भी चर्चा में हैं. उन्होंने एक निजी न्यूज़ चैनल के साथ चर्चा में अपनी बात रखी.

तालिबान से दारुल उलूम के जुड़ाव के सवाल पर उन्होंने कहा कि यह बिल्कुल जहालत की बातें हैं, नादानी की बाते हैं. लोग नहीं जानते हैं. उलेमा ने हिंदुस्तान की आजादी के लिए जो किरदार अदा किया है, उसकी तुलना किसी से नहीं हो सकती. 1915 में तुर्की और जर्मनी की सहायता से मौलाना हजरत शेखुद्दीन ने अफगानिस्तान के अंदर अंग्रेजों की मुखालफत के लिए आजाद हिंद नाम की भारत के लिए एक अस्थाई गवर्नमेंट बनाई थी. उस गवर्नमेंट में राजा महेंद्र प्रताप सिंह को सदर, मौलाना बरकतुल्लाह भोपाली को उसका वजीर-ए-आजम और उबैदुल्लाह सिंधी को गृहमंत्री बनाया गया था.

इन सबने अफगानिस्तान में जाकर काम किया. उस वक्त वहां, बहुत सारे अफगानी उलेमा के पीछे-पीछे चल पड़े. मैंने पहले भी कहा है, जो लोग खुद को देवबंदी समझते हैं, यह वही लोग हैं जो शेखुद्दीन के फॉलोअर्स के वंशज हैं. अफगानिस्तान में देवबंदी मदरसे भी तभी बने. इन लोगों ने कभी दारुल उलूम आकर कोई तालीम हासिल नहीं की. मैं पूछता हूं कि कौन सी गवर्नमेंट हैं जिसने अफगानियों को वीजा देकर हमारे यहां पढ़ने के लिए बुलाया.

आगे उन्होंने कहा कि तालिबान की विचारधारा तो यह है कि वे गुलामी को कुबूल नहीं करते. हमारे पूर्वजों की विचारधारा भी यही थी. दारुल उलूम बना ही गुलामी की मुखालफत के लिए है. इसी विचारधारा पर चलते हुए इन्होंने रूस और अमेरिका की गुलामी की जंजीरों को तोड़ा. बाकी हमारा उनसे कोई ताल्लुक नहीं है. आजकल तो हम खत भी लिखते हैं तो वह सेंसर होता है. फोन पर बात करते हैं, वह भी रिकॉर्ड होती है. कोई यह साबित ही नहीं कर सकता कि दारुल-उलूम का कोई व्यक्ति तालिबानियों से बात करता है.

उन्होंने कहा कि कौन कहता है कि सिर्फ शरिया ही कहता है कि लड़के और लड़कियां साथ नहीं पढ़ सकते. हिंदुस्तान के अंदर कितनी यूनिवर्सिटी और कॉलेज हैं जो कोएड नहीं हैं. लड़कियों के अलग और लड़कों के लिए अलग कॉलेज हैं. तो क्या इन कॉलेजों की बुनियाद तालिबान ने रखी थी? क्या इन्हें स्थापित करने वाले सब तालिबान के बाप हैं? हिंदुस्तान में तालिबान की गवर्नमेंट है क्या?

हम किसी को दहशतगर्द नहीं मानते. तालिबानी भी दहशतगर्द नहीं हैं. अगर तालिबान गुलामी की जंजीरों को तोड़कर आजाद हो रहे हैं और तो इसे दहशतगर्दी नहीं कहेंगे. आजादी सबका हक है. अगर वह गुलामी की जंजीर तोड़ते हैं तो हम ताली बजाते हैं. अगर यह दहशतगर्दी है तो फिर नेहरु और गांधी भी दहशतगर्द थे. शेखुद्दीन भी दहशतगर्द थे.

वे सारे लोग जिन्होंने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ लड़ाई लड़ी वे सारे दहशतगर्द हैं. दूसरी बात फतवे को लेकर लोगों की समझ नहीं है. फतवे का मतलब सिर्फ और सिर्फ इतना है कि कोई हमसे जब पूछता है कि इस हरकत या मसले पर इस्लाम का हुक्म क्या है तो हम उसके सवाल का बस जवाब देते हैं. फतवे किसी को पाबंद नहीं बनाते। मानना न मानना आपकी मर्जी.

टिप्पणियाँ

अभी कोई टिप्पणी नहीं। पहले टिप्पणी करें!